माँ को अपनी बेटी ‘अंतिम पूंजी’ क्यों लग रही थी?

माँ एवं बेटी का रिश्ता बेहद ही प्यारा होता है बेटी माँ के हर सुख दुख की साथी होती है| एक स्त्री होने के नाते बेटी अपनी माँ की हर मुश्किल समझती है एवं हर कष्ट में उसके साथ खड़ी रहती है| बेटी माँ के सबसे निकट होती है माँ उसे अपनी अंतिम पूंजी की भाति सहेज कर रखती है| जिस प्रकार अंतिम पूंजी चले जाने पर जीवन यापन कठिन हो जाता है उसी प्रकार बेटी के ससुराल चले जाने पर माँ का जीवन यापन करना मुश्किल हो जाता है इसलिए माँ बेटी को अपनी अंतिम पूंजी समझती है |


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